5 जून को नियतक्षेत्र कलमणा अंतर्गत मौजा पलसगांव तेंदु गोडावुन के परिसर मे खरगोश को जाल बिछाकर शिकार होने की गुप्त जानकारी वनपरिक्षेत्र अधिकारी, बल्हारशाह को मिली. जानकारी के मुताबिक पलसगांव के तेंदु गोडावुन के पीछे परिसर में जाल बिछाकर आरोपी नामे दिलीप रामा मेश्राम, वय 37 वर्षे, रा.गोंगले, तह. सडक अर्जुनी, जि. गोंदिया, राजु काशीराम मेश्राम, वय 39 वर्षे, रा.उमरी, तह.साकोली, जि. भंडारा, भोजराम शंकर कोल्हे, वय 34 वर्षे, रा.सोंदळ, तह.सडक अर्जुनी, जि.गोंदिया, विनोद रामकृष्ण वेंडवार, वय 42 वर्षे, रा.सोंदळ, तह. सडक अर्जुनी, जि. गोंदिया, सुभाष वासुदेव चन्ने, वय 44 वर्षे, रा. सोंदळ, तह. सडक अर्जुनी, जि.गोंदिया, पुरुषोत्तम मोतीराम वलथरे, वय 45 वर्षे, रा. किन्ही, तह. साकोली, जि. भंडारा, फागु पांडुरंग शेन्डे, वय 50 वर्षे, रा. किन्ही, तह. साकोली, जि. भंडारा इनको एक जिंदा घायल खरगोश और वन्यप्राणी शिकार की जाल जप्त किया गया. घायल खरगोश वन्यजीव उपचार केन्द्र, ताडोबा अंधारी व्याघ्र प्रकल्प, चंद्रपुर में भेजा गया. लेकिन उपचार के समय खरगोश दिनांक 06.06.2024 को मृत हुआ.
जब उक्त आरोपियों से आगे पूछताछ की गई तो उन्होंने खरगोशों का मांस खाने के लिए शिकार करने की बात कबूल कर ली. उपरोक्त सभी आरोपियो पर वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 2,9, 39, 44, 51 और 52 के तहत वन अपराध जारी किया गया था और वन अपराध में इस्तेमाल की गई सामग्री को जब्त कर लिया गया था और एक जब्ती दर्ज की गई थी और उसके बाद आरोपियों की चिकित्सा जांच कर न्यायधीश, प्रथम श्रेणी न्यायालय, बल्लारपुर में पेश किया गया. वन विभाग की ओर से सरकारी वकील श्रीमती संगीता डोंगरे इस मामले को देख रही हैं। उक्त मामले की आगे की जांच मध्य चांदा वनविभाग के उपवन संरक्षक, चंद्रपुर, श्रीमती स्वेता बोडडू और सहायक वन संरक्षक आदेश कुमार शेंडगे के मार्गदर्शन में वन परिक्षेत्र अधिकारी नरेश भोवरे के कर रहे हैं. उक्त कार्यवाही के दौरान क्षेत्र सहायक, वी.टी.पुरी, वन रक्षक परमेश्वरा आनकाड़े, सुनील नन्नावरे, मनोहर धाईत, सुश्री भारती तिवाड़े और दैनिक वन संरक्षण कार्यकर्ताओं ने सहयोग किया।