पंडित दीनदयाल उपाध्याय हिंदी विद्यापीठ द्वारा ” विद्या वाचस्पती सारस्वत सम्मान ” समारोह का आयोजन
श्रेयश वानखेडे:
पंडित दीनदयाल उपाध्याय हिंदी विद्यापीठ द्वारा ” विद्या वाचस्पती सारस्वत सम्मान ” समारोह का भव्य आयोजन रविवार दिनांक 22 डिसेंबर 2024 को होटल सायाजी, विजयनगर इंदौर (मध्य प्रदेश) में किया गया।
इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथी मान. श्री. देवेंद्र कुमार जैन जी सेवानिवृत्त न्यायाधीश म. प्र. शासन भोपाल, विशिष्ट अतिथी मान. श्री. विष्णुकांत कनकने जी तकनीकी प्रदेश प्रभारी मुख्यमंत्री उदय योजना शिक्षा विभाग म. प्र. शासन भोपाल, मुख्य वक्ता मान. सुश्री दीपा मिश्रा जी सुप्रसिद्ध कथा- वाचिका वृंदावन धाम मथुरा, विशिष्ट सानिध्य मान. डॉ. विश्वनाथ पाणिग्रही जी राष्ट्रीय पर्यावरणविद एवं वर्ल्ड रेकॉर्ड धारी बागबाहारा जिल्हा महासमुंद( छत्तीसगड), विशिष्ट अतिथी मान. डॉ. शिवाजी शिंदे जी महाराष्ट्र राज्य संयोजक पंडित दीनदयाल उपाध्याय हिंदी विद्यापीठ इत्यादी विद्वतजनों की मंच पर उपस्थिती थी।
प्रथमता: मंच पर उपस्थित विद्वतजनों के पावन हाथों से द्वीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की सुरुवात की गई। मंच पर उपस्थित विद्वतजनों का स्वागत किया गया।
विशिष्ट सानिध्य मान. डॉ. विश्वनाथ पाणिग्रही जी ने कहा की, पुरे देश में हिंदी भाषा को विशेष दर्जा प्राप्त होना चाहिये। उसे अच्छे रूप से स्थापित करणे, हिंदी भाषा का विकास और उससे ऊर्जा प्राप्त हेतू प्रयासरत रहना जरुरी है।
मुख्य अतिथी मान. श्री. देवेंद्र कुमार जैन जी ने कहा की, हमारी राष्ट्रभाषा हिंदी है देश के कई हिस्सो मे हिंदी बोलीभाषा, सिखी भाषा भी है। हर हिंदुस्तानी को इस पर गर्व होना चाहिये और जादा प्रमाण मे अखबारों मे हिंदी भाषा का प्रयोग होना चाहिये।
विशिष्ट अतिथी मान. श्री. विष्णुकांत कनकने जी ने कहा की, पुरे हिंदुस्तान में पचास प्रतिशत पत्राचार हिंदी भाषा में होना चाहिये हिंदी भाषा में अच्छा काम करते रहना चाहिए।
मुख्य वक्ता मान. सुश्री दीपा मिश्रा जी ने कहा की, हिंदी भाषा माथे का चंदन है। राग नही, अनुराग नही, राम कृष्ण के धरती का पर्यावरण है। हिंदी भाषा से नाता जोडना चाहिये, हिंदी भाषा को बढावा देना चाहिए।
मान. डॉ. शिवाजी शिंदे जी ने कहा की, हिंदी भाषा का प्रचार और प्रसार होना चाहिये, हिंदी भाषा को राष्ट्रभाषा के अनुरूप देखना चाहिए, दर्जा मिलना चाहिए।
इसके उपरांत देश के कोने कोने से आये हुए महानुभावों को उनके हिंदी भाषा में विभिन्न कार्य हेतू ” विद्या वाचस्पती सारस्वत सम्मान ” से मंच पर उपस्थित मान्यवरों के हाथों मेडल और डिग्री देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के शुरुवात मे ऋग्वेद के मंत्र धृति घिमिरे ने गा कर सूनाये। इस कार्यक्रम मे स्वच्छता की शपथ ली गई। मंच पर उपस्थित मान्यवरों को स्मृतीचिन्ह भेट दिये गये।
कार्यक्रम का प्रास्ताविक, संचालन एवं आभार जानकी वल्लभ शास्त्री जी ने किया। आखिर में राष्ट्रगान गाकर कार्यक्रम का समापन किया गया। इस कार्यक्रम के सफल आयोजन हेतू डॉ. एस. प्रकाश जी संयोजक के मार्गदर्शन में पंडित दीनदयाल उपाध्याय हिंदी विद्यापीठ वृंदावन धाम मथुरा (उत्तर प्रदेश) के सभी कर्मचारीयों के परिश्रम प्राप्त हुए।