बामणी स्थित मोंटफोर्ट स्कूल बल्लारपुर में दिनांक 23 एप्रिल को पुस्तक दिन का आयोजन किया गया हालांकि हर दिन कुछ ना कुछ रूप में विशेष होता है संसार में अनेक दिन का एक विशेष व महत्व माना गया है इस प्रकार 23 एप्रिल यह विश्व पुस्तक के दिन के रूप में इसको मान्यता मिली है स्कूल के प्राचार्य प्रेम कुमार ने विद्यार्थियों को पुस्तक के बारे में बताते हुए कहा नागरिकों व विद्यार्थियों में पुस्तक के प्रति लगन निर्माण करना पुस्तक को पढ़ने वाले व्यक्ति के प्रोत्साहन देने के लिए व पुस्तक लिखने वाले व्यक्तियों को (लेखक )को सम्मान के दिवस के रूप में इस दिन को मनाया जाता है विशेष कर बच्चों में पुस्तक के प्रति लगाव निर्माण करना इसका मकसद होता है पुस्तक हर व्यक्ति का सबसे अच्छा दोस्त माना जाता है क्योंकि व्यक्ति को पुस्तक ज्ञान देता है बदले में कुछ नहीं मांगता जो व्यक्ति पुस्तक पढ़ कर पढ़ाई कर ज्ञान प्राप्त करता है वह व्यक्ति हर परिस्थिति को सामना करने के लिए सक्षम होता है वर्तमान व भविष्य की पीढ़ी के लिए किताबों में रुचि पैदा करना इसका मुख्य उद्देश्य है । संस्कृत व साहित्यिक महत्व के कारण और हर किसी को पढ़ने का आनंद लेने के लिए प्रोत्साहन करने के लिए यह दिन मनाया जाता है यह सामाजिक सांस्कृतिक प्रगति के लिए भी एक बड़ा योगदान है 1972 को संयुक्त राष्ट्र द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक वर्ष घोषणा की गई इस कार्यक्रम में प्रमुखता से उपस्थित स्कूल के उपप्राचार्य किशोर कुमार शिक्षक घनश्याम बुरडकर ग्रंथालय में विद्यार्थि बडी संख्या में उपस्थित थे।