बल्लारपुर नगरपरिषद चुनाव में गंभीर अव्यवस्थाओं को लेकर आम आदमी पार्टी की जिला चुनाव अधिकारी से तत्काल जांच की मांग - AAP का आरोप: सत्ताधारी पार्टी को चुनाव आयोग का स्पष्ट समर्थन मिला हुआ है।
बल्लारपुर नगरपरिषद चुनाव में गंभीर अव्यवस्थाओं को लेकर आम आदमी पार्टी की जिला चुनाव अधिकारी से तत्काल जांच की मांग - AAP का आरोप: सत्ताधारी पार्टी को चुनाव आयोग का स्पष्ट समर्थन मिला हुआ है।
दिनांक 03 दिसंबर 2025 को आम आदमी पार्टी बल्लारपुर की ओर से शहराध्यक्ष रविकुमार शं. पुप्पलवार ने मान. जिला निर्वाचन अधिकारी और जिलाधिकारी, चंद्रपूर को एक विस्तृत लिखित ज्ञापन सौंपा है। यह मांग नगरपरिषद चुनाव प्रक्रिया के दौरान हुई अभूतपूर्व अव्यवस्थाओं, मतदाताओं के नामों में विसंगतियों, मतदाता सूची को अपडेट न करने, पैसों के वितरण और प्रशासन की निष्क्रियता के खिलाफ कठोर और तात्कालिक कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए की गई है।
सैकड़ों मतदाताओं के नाम उनके वास्तविक प्रभाग की बजाय पूरी तरह से अलग प्रभागों में दर्ज किए गए, जिसके कारण नागरिक मतदान नहीं कर पाए।
वोटर आईडी कार्ड होने के बावजूद नाम मतदाता सूची में नहीं थे, जिससे स्पष्ट होता है कि मतदाता सूची को अपडेट करने की प्रक्रिया लापरवाही से की गई।
दो बार नाम दिखाकर मतदाताओं को मतदान का अधिकार नकारना, जो सीधे तौर पर लोकतंत्र पर हमला है।
बीएलओ (BLO) और चुनाव अधिकारियों ने घर-घर जाकर सत्यापन नहीं किया, और बार-बार अनुरोध करने पर भी जानबूझकर अनदेखी की गई।
कुछ प्रभागों में खुलेआम पैसों का वितरण हुआ, जिसके वीडियो सबूत प्रशासन को दिए जाने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई।
QR कोड और वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी त्रुटिपूर्ण थी; ऑनलाइन नाम दिखने पर भी बूथ पर अंतिम सूची में नाम गायब थे।
उच्च स्तरीय, निष्पक्ष और तत्काल जांच की जाए।
अव्यवस्था के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर फौजदारी कार्रवाई की जाए।
मतदाता सूची को अद्ययावत करने के लिए कठोर निर्देश दिए जाएं।
भविष्य के चुनावों में पारदर्शी प्रणाली लागू की जाए।
बड़ी संख्या में नागरिकों के मतदान न कर पाने के कारण आवश्यक होने पर विशेष पुनर्विचार प्रक्रिया शुरू की जाए।
अगली चुनाव प्रक्रिया में पार्टी प्रतिनिधियों को बूथ पर बैठने के लिए स्पष्ट और पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
आम आदमी पार्टी बल्लारपूर के शहराध्यक्ष रविकुमार पुप्पलवार ने कहा,
“इस चुनाव में हुई अव्यवस्था लोकतंत्र पर सीधा आघात है। नागरिकों का विश्वास पुनः स्थापित करने के लिए प्रशासन को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। अन्यथा हम न्यायालयीन मार्ग अपनाने के लिए बाध्य होंगे।”