बल्लारपुर में अवैध अतिक्रमण पर फूटा पत्रकारों का गुस्सा, कहा – “मौत का रास्ता बना शहर, जिम्मेदार कौन?”
ज्योत्स्ना वानखेडे: बल्लारपुर शहर में लगातार बढ़ रहे यातायात दबाव और आए दिन हो रही सड़क दुर्घटनाओं में निरापराध नागरिकों की मौत के लिए जिम्मेदार अवैध अतिक्रमण के खिलाफ अब आवाज बुलंद होने लगी है। इसी गंभीर मुद्दे को लेकर महाराष्ट्र पत्रकार संघ शाखा बल्लारपुर ने जिलाधिकारी विनय गौड़ा को कड़ा निवेदन सौंपते हुए तत्काल और ठोस कार्रवाई की मांग की है। इस समय जिला प्रशासन और बल्लारपुर प्रशाशन के सभी प्रमुख अधिकारी मौजूद रहे पत्रकारों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पेपर मिल से बामणी मार्ग, तहसील कार्यालय के सामने, रेलवे चौक, पुराना और नया बस स्टैंड, एंट्री गेट के पास, और पेपर मिल परिसर, सुभाष टॉकीज के आसपास सहित कई प्रमुख स्थानों पर अवैध अतिक्रमण के कारण सड़कें संकरी हो चुकी हैं। नतीजतन आए दिन जाम लगना और हादसे होना आम बात बन गई है। जहां अधिक वाहन खड़े होने के स्थान पर सुलभपार्किंग व्यवस्था उपलब्ध करवाना प्रशासन की जिम्मेदारी है। सवाल यह है कि जब प्रशासन को सब कुछ दिखाई दे रहा है तो कार्रवाई कब होगी? पत्रकारों ने दो टूक कहा “जब तक कोई बड़ी दुर्घटना नहीं होती, तब तक प्रशासन क्यों जागता नहीं?” शहर में हो रही मौतों के लिए आखिर जिम्मेदार कौन? अवैध कब्जाधारी या मूकदर्शक बने अधिकारी?
निवेदन सौंपते समय महाराष्ट्र पत्रकार संघ शाखा बल्लारपुर के अध्यक्ष रमेश निषाद के साथ विकास राजुरकर, राहुल गायकवाड़, शंकर महाकाली, प्रमोद गहलोत, राजू राठौड़ सहित अनेक पत्रकार बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। पत्रकारों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो जनआंदोलन छेड़ा जाएगा। अब गेंद प्रशासन के पाले में है। देखना होगा कि कागजों तक सीमित रहने वाली कार्रवाई इस बार सड़कों पर दिखाई देती है या फिर शहर यूं ही ‘अतिक्रमण की आग’ में जलता रहेगा।