Sunday, May 3, 2026
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*जुनगांव रेती घाट पर माफियाओं की दबंगई!*

*जुनगांव रेती घाट पर माफियाओं की दबंगई!*

*महसूल  कार्रवाई के नाम पर प्रशासन का केवल फर्जीवाड़ा!*  

ज्योत्स्ना वानखेडे:

एक तरफ सरकार महसूल बढ़ाने के लिए नए-नए नियम लागू कर रही है, दूसरी तरफ पोम्भूर्णा तालुका के जुनगांव  रेती घाट पर मात्र ‘रामायण’ शुरू है। गोंडपिपरी उपविभागांतर्गत यह घाट इस समय अवैध उत्खनन का केंद्र बन गया है, और चंद्रपुर का एक बड़ा व्यापारी पर्दे के पीछे से यहां नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ा रहा है। विशेष  रेती तस्कर के सामने महसूल प्रशासन बेबस हो गया है या क्या, ऐसा संतप्त सवाल अब उपस्थित हो गया है।

कुछ दिन पहले जुनगांव घाट पर अवैध उत्खनन करने वाली  पोकलेन मशीन प्रशासन ने जब्त की थी। नियमानुसार ऐसे गंभीर गुनाह पर तुरंत पुलिस शिकायत (FIR) होना अपेक्षित था। मगर, अनेक दिन बीत जाने पर भी महसूल विभाग ने अब तक पुलिस थाने की पायरी चढ़ने की तसदी नहीं ली। कार्रवाई के नामखातिर केवल कागजी घोड़े नचाए जाते हैं, असली तस्करों की ‘डेरिंग’ अब बढ गई है। प्रशासन से ज्यादा माफिया का दबदबा है, इसका यह जीवंत उदाहरण है।

सदर माफिया ने दो 12 चक्का ‘आयवा’ ट्रक गोंडपिपरी तहसील अंतर्गत अवैध रूप से वाहतूक करते हुए पकड़े गए। हैरानी की बात यह है कि इन ट्रकों में तब्बल 10 ब्रास रेती थी, जो स्पष्ट रूप से ‘ओवरलोड’ की श्रेणी में आती है। नियमानुसार, ओवरलोड गाड़ियों का प्रस्ताव आरटीओ को भेजकर उनके परवाने कम से कम एक महीने के लिए निलंबित करने का प्रावधान है। मगर, महसूल विभाग ने न ओवरलोड का चलान फाड़ा, न आरटीओ को रिपोर्ट दी। याचक महसूल विभाग और माफिया के ‘मधुर’ सूत्र असलियत की चीख-चीख कर जनमानस में रेंगू लग गई है।

एक तरफ पोम्भूर्णा तहसीलदार और एसडीओ ने 9 आयवा ट्रक और 5 पोकलेन मशीन पकड़े जाने की बातें फैलाई जाती हैं, मगर प्रत्यक्ष में उस माफिया पर कठोर गुनाह दर्ज क्यों नहीं हो रहा?  अट्टल तस्कर को खुली छूट देकर प्रशासन खुद के ही अखेरे चिवड़े काढ रहा है। “एक  ने मुंबई के वाटोले किए होते, तो यह जिले के महसूल के वाटोले कर रहा है,” ऐसी टिपणी अब नागरिक करने लगे हैं।

*निलंबित करने की हिम्मत प्रशासन दिखाएगा क्या?*

12 चक्का ट्रकों में 10 ब्रास रेती होने के बावजूद महसूल विभाग ने आरटीओ को कार्रवाई का प्रस्ताव क्यों नहीं भेजा? जब केले के पोकलेन मशीन पर अथवा फौजदारी गुनाह दाखिल क्यों नहीं हुआ? महसूल विभाग को कैसा डर सातारा रहा  है? संबंधित वाहनों के परवाने एक महीने के लिए निलंबित करने की हिम्मत प्रशासन दिखाएगा या महसूल विभाग के अधिकारी उस तस्कर के दबाव में या उसके साथ आर्थिक हितसंबंध जुड़े हुए हैं? अगर इन प्रश्नों के उत्तर तत्काल नहीं मिले, तो पोम्भूर्णा और गोंडपिपरी परिसर से सरकार का महसूल नहीं, बल्कि केवल माफियाओं की तिजोरी भरेगी, यह निश्चित है! सदर घटने की जानकारी लेने के लिए पोम्भूर्णा तहसीलदार को बार-बार फोन करने पर भी उन्होंने अपना फोन नहीं उठाया।

Raju Kisanrao Wankhede
Editor
+91 9420868738+91 9420868738rajuwankhede15@gmail.com
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