गोंडपिपरी में रातभर रेत का ‘खेल’ ; महसूल प्रशासन की गश्त टीम सुस्त या ‘मस्त’?
ज्योत्स्ना वानखेडे:
गोंडपिपरी तालुका और शहर में फिलहाल जगह-जगह अवैध रेत के ढेर दिखाई दे रहे हैं। घाटों की नीलामी हो चुकी होने के बावजूद रात 12 से सुबह 5 बजे के दौरान शहर में अवैध रेत की रेती कैसे आ रही है, ऐसा प्रश्न अब उपस्थित हो रहा है। खास बात यह है कि इस पूरे मामले की ओर महसूल प्रशासन की गश्त टीम का जो दुर्लक्ष है, वह सिर्फ काम के प्रति लापरवाही है या फिर माफिया के साथ उनका ‘आर्थिक हितसंबंध’ है, ऐसी चर्चा है।
अब तालुका में रंगत आ गई है। तालुका में अवैध रेत उपसा रोकने के लिए महसूल प्रशासन ने पथक तैयार किए हैं। मगर, अब तक की कार्रवाई का आंकलन करने पर केवल एक महिला कर्मचारी धाड़स के साथ कार्रवाई करती दिख रही है। उल्टे, पथक के बाकी पुरुष कर्मचारी और अधिकारी ठोस कार्रवाई करना तो दूर, कहीं दिखते ही नहीं हैं। रात के समय जब बड़े पैमाने पर रेत की तस्करी होती है, तब यह पुरुष पथक आखिर कहां होता है? इसके चलते अब वरिष्ठ स्तर से इन ‘सुस्त’ पुरुष कर्मचारियों पर कार्रवाई करने की जरूरत पैदा हो गई है।
गांव की प्राकृतिक संपदा की रक्षा करने की प्राथमिक जिम्मेदारी स्थानीय पुलिस पाटील, कोतवाल और ग्रामपंचायत समिति की होती है। मगर, गोंडपिपरी तालुका में अवैध रेत उपसा के बारे में क्या स्थानीय प्रतिनिधि प्रशासन को जानकारी नहीं दे रहे? या फिर उनके भी हाथ इस माफिया के साथ मिले हुए हैं? ऐसा संदेह नागरिक व्यक्त कर रहे हैं। कार्रवाई में कसूर करने वाली यह स्थानीय मशीनरी अब बुरी तरह बेनकाब होती दिख रही है।
प्रशासन पंचनामा करेगा या मामला दबाएगा?
अब सबका ध्यान महसूल प्रशासन की आगे की भूमिका पर लगा है।
रेत ठगने वाले माफिया पर कठोर कार्रवाई होगी क्या? हमेशा की तरह सिर्फ ‘कागजी घोड़े’ दौड़ाकर मामला दबाया जाएगा? रात के अंधेरे में चलने वाले इस काले धंधे में महसूल पथक की भागीदारी होने की चर्चा अब शहर में जोर पकड़ने लगी है।
जिलाधिकारी इस गंभीर मामले को गंभीरता से लेकर गोंडपिपरी के इस ‘अर्थपूर्ण’ शांतिपूर्ण माहौल का पर्दाफाश करें, ऐसी मांग आम जनता कर रही है।