निराधारों को जीवन प्रमाणपत्र के साथ इंकम सर्टिफिकेट महाराष्ट्र सरकार की शर्त बन रही है गले की हड्डी।
ज्योत्स्ना वानखेडे:
विगत कुछ वर्षों से दिव्यांग,वृद्ध,विधवा पेंशन लाभार्थियों को प्रति वर्ष हयात प्रमाण पत्र तहसील कार्यालय के जमा करना अनिवार्य होता है। जिस से यह पुष्टि की जाती है कि लाभार्थी योजना का लाभ लेने हयात में है।
लेकिन कुछ वर्षों से इस जीवन प्रमाणपत्र की प्रक्रिया को काफी जटिल करदिया गया है। जीवन प्रमाण पत्र के साथ,साथ इंकम सर्टिफिकेट भी मांगा जा रहा है। जिसे बनाने में काफी सारे लोगों को दांतों तले लोहे के चने चबाएं जैसे साबित हो रहा है।
साथ ही साथ हर वर्ष अलग, अलग नियम लादे जा रहे है।व्यवस्था में बैठे कर्मचारी या अधिकारी को ही पता नहीं रह रहा है कि इन निराधारों से कौनसे कागज लेना है और कौनसे नहीं लेना है।
जिस संदर्भ में दिनांक:०६/०४/२०२६ को बल्लारपुर तहसील कार्यालय में तहसीलदार से विस्तृत चर्चा करने दिव्यांग हक्क संघर्ष समिति के सदस्य गण तहसील कार्यालय पहुंचे थे किंतु तहसीलादर के उन उपस्थिति के चलते दिव्यांगजनों को नायब तहसीलदार अजय मल्लेलवार जी को ज्ञापन देकर लौटना पड़ा ।
निवेदन में दिव्यांगजनों की यह मांग थी कि यदि सरकार की शर्त इंकम सर्टिफिकेट की है तो निराधारों को आसानी से इंकम सर्टिफिकेट उपलब्ध कराकर दिया जाए ।
ऐसी आसान व्यवस्था बनाकर दी जाए जिस से दिव्यांग जनों को और अन्य लाभार्थियों को तहसील कार्यालय या पटवारी कार्यालय के चक्कर ना लगाना पड़े।
इंसान को लेकर काफी सारे दिव्यांग जन कार्यालय में उपस्थिति रहे जिस में प्रमुखता से उपस्थित में विकास भगत, दिनेश पटेल, इरशाद शेख, गेडाम, मधुकर उमरे, सुरेश केशकर, प्रिया त्रिपाठी, रूपा राठौड़, संगीता गायकवाड़, गिरजा बाई दिव्यांग नेता आसीफ हुसेन शेख इत्यादि मौजूद रहे ।