*वन कानूनों का उल्लंघन, संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग*
ज्योत्स्ना वानखेडे:
एटापल्ली वनपरिक्षेत्र में अवैध वृक्ष कटाई, वन्यजीव शिकार तथा अवैध उत्खनन के मामले बड़े पैमाने पर शुरू होने से पूरे जिले में खलबली मच गई है।
मूल्यवान वनसंपदा और दुर्लभ वन्यजीवों के लिए प्रसिद्ध इस जंगल में इन दिनों पेड़ों के तस्कर और शिकारी टोलियां सक्रिय होने के संकेत मिल रहे हैं।
भामरागड़ वनविभाग के अंतर्गत आने वाले आलापल्ली परिसर में हाल ही में की गई कार्रवाई में एटापल्ली तालुका के उड़ेरा में आरोपी पकड़े गए, जिनसे राज्य पक्षी हरियाल, दयाल (रॉबिन) तथा राज्य प्राणी शेकरू (उड़ने वाली गिलहरी) का शिकार किया जाना उजागर हुआ है। इस घटना से वन्यजीव संरक्षण पर बड़ा प्रश्नचिन्ह निर्माण हो गया है।
विशेष रूप से, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972, भारतीय वन अधिनियम 1927, वनसंवर्धन अधिनियम 1980, तथा खनिज व खनिज (विकास व नियमन) अधिनियम 1957 जैसे सख्त कानूनों के बावजूद एटापल्ली वनपरिक्षेत्र में अवैध वृक्ष कटाई और उत्खनन के मामले जारी रहने की बात सामने आई है।
स्थानीय नागरिकों के अनुसार, जंगल से मूल्यवान लकड़ी व वनसंपदा की चोरी, तथा वन्यजीवों का शिकार लगातार जारी है, और इस ओर संबंधित वनपरिक्षेत्र अधिकारी व कर्मचारियों का दुर्लक्ष हो रहा है, ऐसा आरोप लगाया जा रहा है। उपक्षेत्रों में बार-बार होने वाली इन घटनाओं पर नियंत्रण रखने में असफल रहने से प्रशासन की कार्यक्षमता पर सवाल उठ रहे हैं।
इस दौरान, सामाजिक कार्यकर्ताओ ने मुख्य वनसंरक्षक, वनवृत्त गड़चिरोली को निवेदन सौंपकर इस पूरे प्रकरण की गहन जांच करने की मांग की है। दोषियों पर कठोर कार्रवाई के साथ-साथ संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर विभागीय कार्रवाई करने, तथा जंगल संरक्षण के लिए विशेष पथक व प्रभावी उपाययोजना तत्काल लागू करने की मांग उन्होंने की है।
एटापल्ली जंगल में बढ़ती अवैध गतिविधियों के कारण पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है, और प्रशासन से तत्काल कठोर कदम उठाने की आवश्यकता जताई जा रही है।