Saturday, May 9, 2026
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*शिक्षण विभाग का ‘महाघोटाला’ या प्रशासनिक लाचारी?*

*शिक्षण विभाग का ‘महाघोटाला’ या प्रशासनिक लाचारी?* 

*एक ही समय स्कूल और कॉलेज में ड्यूटी बजाने वाले ‘अवतार’ बेलगाम! | मोरेश्वर गौरकर प्रकरण पर चंद्रपुर जिला परिषद की ढुलमुल नीति | शासन के आदेशों को ताक पर रखकर ‘अर्थपूर्ण’ चुप्पी*  

  

*ज्योत्स्ना वानखेडे*: एक ही समय दो जगह उपस्थित रहने का ‘दैवी चमत्कार’ चंद्रपुर जिला परिषद के शिक्षा विभाग में हुआ है। एक तरफ जिला परिषद के स्कूल में अध्यापक का वेतन लेना और उसी समय दूसरे शहर में ‘रेगुलर बी.एड.’ की हाजिरी लगाकर डिग्री हासिल करना, यह जादुई कारनामा मोरेश्वर गौरकर समेत कई लोगों ने कर दिखाया है।

मगर, इस खुली धोखाधड़ी पर जांच के आदेश देकर भी सालभर फाइलें दबाकर बैठे शिक्षा विभाग की भूमिका के कारण ‘प्रशासन की रीढ़ आखिर कहाँ गिरवी रखी है?’ ऐसा गुस्से भरा सवाल अब पूछा जा रहा है।

कार्यरत शिक्षक द्वारा नियमित बी.एड. करने पर कार्रवाई न किए जाने से, संबंधित शिक्षाधिकारी तथा मुख्याध्यापकों पर कार्रवाई करने के संबंध में मा. शिक्षा उपसंचालक नागपुर के पत्र दि. 17 जुलाई 2025  के अनुसार जिले के सभी गुटशिक्षाधिकारी को रिपोर्ट पेश करने के लिए शिक्षाधिकारी प्राथमिक जिला परिषद चंद्रपुर ने पत्र भेजकर रिपोर्ट भेजने को कहा था।

आज तक रिपोर्ट में देरी है तो कार्रवाई क्यों नहीं? ऐसा सवाल उठ रहा है। और यदि रिपोर्ट मिल गई है तो जिला परिषद चंद्रपुर शिक्षा विभाग द्वारा कार्रवाई न करने से वरिष्ठों के आदेश को कूड़ेदान दिखाया गया है। ऐसा कहना गलत नहीं होगा।

*कानून की लगाम और शासन के आदेश:* इस प्रकरण में प्रशासन ने जानबूझकर नीचे दिए शासन निर्णयों की अनदेखी की है:

– *स्कूली शिक्षा विभाग, शासन निर्णय (10 मई 2009):* इसके अनुसार, नौकरी पर रहते हुए बिना अनुमति नियमित पाठ्यक्रम पूरा करना गंभीर सेवा-अपराध है, और ऐसे शिक्षक पर तुरंत अनुशासनात्मक कार्रवाई करना बंधनकारक है।

– स्कूली शिक्षा विभाग के 10 मई 2009 के शासन निर्णय के अनुसार, सेवा में रहते हुए ‘नियमित’ शिक्षा के लिए विभाग की पूर्व अनुमति और बिना वेतन छुट्टी लेना अनिवार्य है। नियमित बी.एड. के लिए 75% हाजिरी अनिवार्य होते हुए गौरकर स्कूल में हाजिर थे या कॉलेज में? यह बड़ा सवाल है। यह प्रकार भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत धोखाधड़ी (Cheating) का फौजदारी अपराध बनता है।

– *सामान्य प्रशासन विभाग, शासन निर्णय (15 मई 2012):* सेवा काल में योग्यता प्राप्त करते समय नियमों का उल्लंघन होने पर संबंधित कर्मचारी की वेतनवृद्धि रोकना और पदोन्नति रद्द करना स्पष्ट लिखा है।

– *सूचना का अधिकार अधिनियम 2005:* प्रशासन द्वारा एक साल तक जानकारी छुपाकर रखना, सूचना आयोग के निर्देशों का सीधा उल्लंघन है और दोषी अधिकारियों पर धारा 20 के तहत दंडात्मक कार्रवाई बनती है।

*न्यायालय का प्रहार:* मा. उच्च न्यायालय ने कई प्रकरणों में स्पष्ट किया है कि, ‘सार्वजनिक धन (Public Money) का उपयोग करके कर्तव्य में लापरवाही करना जनता के साथ विश्वासघात है।’ गौरकर ने एक ही समय दो जगह हाजिरी लगाकर शासन और विद्यार्थियों के साथ धोखाधड़ी की है। यह सिर्फ अनुशासनहीनता नहीं बल्कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत ‘धोखाधड़ी’ (Cheating) और ‘झूठी एंट्री करना’ जैसे फौजदारी अपराध हैं।

*प्रशासन को अंतिम चेतावनी:* शिक्षा विभाग में ‘सफेदपोश’ भ्रष्टाचार चरम पर है, और जांच रिपोर्ट दबाकर बैठे अधिकारी भी इसमें सह-आरोपी हैं। यदि अगले 7 दिनों में संबंधित शिक्षक पर निलंबन (Suspension) की कार्रवाई करके फौजदारी मामला दर्ज नहीं हुआ, तो यह प्रकरण ‘जनहित याचिका’ (PIL) के जरिए उच्च न्यायालय में ले जाकर संबंधित जांच समिति के सदस्यों को भी आरोपी के कटघरे में खड़ा किया जाएगा। ऐसा शिकायतकर्ता ने कहा है।

 *प्रशासन से तीखे सवाल:* जांच पूरी होने के बावजूद प्रशासन ‘कैश मोड’ पर क्यों नहीं आ रहा? इस प्रकरण की ‘अर्थपूर्ण’ शांति के कारण शिक्षा विभाग की छवि पर सवालिया निशान लग गया है।

नियमित बी.एड. करके, एक ही समय दोनों जगह उपस्थित रहकर शिक्षकों ने जो रिकॉर्ड बनाया है वह ‘न भूतो न भविष्यति’ है। शासन के साथ धोखाधड़ी होने और नियमों की धज्जियां उड़ने के कारण, अनुशासनात्मक कार्रवाई और लाभ की वसूली करना आवश्यक है।

Raju Kisanrao Wankhede
Editor
+91 9420868738+91 9420868738rajuwankhede15@gmail.com
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