Saturday, September 19, 2026
spot_img
Homeबल्लारपूर*पत्रकारिता धमकी का हथियार नहीं है, लेकिन कुछ लोगों द्वारा इस क्षेत्र...

*पत्रकारिता धमकी का हथियार नहीं है, लेकिन कुछ लोगों द्वारा इस क्षेत्र के नाम का दुरुपयोग*

*पत्रकारिता धमकी का हथियार नहीं है, लेकिन कुछ लोगों द्वारा इस क्षेत्र के नाम का दुरुपयोग*

*पत्रकारिता का मुखौटा लगाकर खुलेआम घूमने वालों की अब गहन जांच होगी*

*पत्रकारिता के नाम पर फर्जीवाड़े का बाजार बंद करो*

*असली पत्रकारिता जनता के लिए होती है… किसी की जेब के लिए नहीं…!*

*फर्जी अखबार, नकली पहचान पत्र और आर्थिक दबाव के खेल पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है*

*पत्रकारिता की आड़ लेकर गलत काम करने वालों का पर्दाफाश करो!*

*ज्योत्स्ना वानखेडे* :

पत्रकारिता के पवित्र पेशे को बदनाम करने वाले फर्जी अखबारों, न्यूज चैनलों और फर्जी पत्रकार पहचान पत्रों के मामलों पर अब कठोर कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। पत्रकारिता के नाम का सहारा लेकर अधिकारियों, व्यापारियों, उद्यमियों और आम नागरिकों पर दबाव बनाकर आर्थिक लाभ लेने के मामले सामने आने की शिकायतों की पृष्ठभूमि में सरकार ने सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए हैं, ऐसी खबर है।

पत्रकारिता धमकी का हथियार नहीं है और पत्रकार का पहचान पत्र किसी पर भी दबाव बनाने का लाइसेंस नहीं है। लेकिन, कुछ लोगों द्वारा इस क्षेत्र के नाम का दुरुपयोग होने से ईमानदार पत्रकारों को ही इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है। इसलिए फर्जीवाड़े का पर्दाफाश कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग जोर पकड़ रही है।

गले में पहचान पत्र डाल लेने से कोई पत्रकार नहीं बन जाता। विधिवत पंजीकृत समाचार संस्थानों में काम करने वाले पत्रकारों की नियुक्ति का संस्थागत आधार होता है। लेकिन, सिर्फ छपा हुआ पहचान पत्र हाथ में लेकर खुद को पत्रकार के रूप में दिखाना और उसका इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए करना एक गंभीर मामला है। ऐसे व्यक्तियों की पहचान, संबंधित संस्था की वैधता और पत्रकार के रूप में उनकी नियुक्ति की जांच होना जरूरी है।

कुछ लोग पत्रकारिता के नाम पर गलत काम कर रहे हैं, तो इसका सीधा असर वर्षों से ईमानदारी से जनता के सवाल उठाने वाले पत्रकारों पर पड़ता है। इसलिए प्रेस के नाम पर चल रही…

पत्रकारिता के नाम पर अगर कोई आर्थिक दबाव, धमकी, जबरन वसूली जैसे काम या अन्य गलत काम कर रहा है, तो ऐसी प्रवृत्तियों पर समय रहते रोक लगाना जरूरी है। एक व्यक्ति के गलत काम की वजह से पूरी पत्रकारिता संदेह के घेरे में नहीं आनी चाहिए। पत्रकार जनता की आवाज होता है। वह सत्ता से सवाल पूछता है, अन्याय के खिलाफ खड़ा होता है और सच को समाज के सामने लाता है। इसलिए पत्रकारिता के नाम पर काला धंधा करने वालों का मुखौटा उतारना सिर्फ सरकार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जरूरत है।

संबंधित खबर में दावे के अनुसार फर्जी अखबारों, फर्जी मीडिया, संदिग्ध पत्रकार पहचान पत्रों और पत्रकारिता के नाम पर गलत काम करने वालों की जांच होने की संभावना है। अब असली कसौटी पहचान पत्र की नहीं, बल्कि पत्रकारिता की वैधता और काम की होगी। पत्रकारिता का मुखौटा लगाकर खुलेआम घूमने वालों, सावधान… असली पत्रकारिता जनता के लिए होती है। किसी की जेब के लिए नहीं।

दुकानदारी और असली पत्रकारिता में फर्क स्पष्ट करने का समय आ गया है। इंटरनेट पर हर न्यूज वेबसाइट का अखबार की तरह पंजीकरण होता ही है, यह समझना भी गलत है। इसलिए मीडिया का नाम, वेबसाइट या सोशल मीडिया पेज का आधार लेकर खुद को अधिकृत पत्रकार के रूप में पेश करने वालों की वैधता की जांच करना जरूरी है।

Raju Kisanrao Wankhede
Editor
+91 9420868738+91 9420868738rajuwankhede15@gmail.com
RELATED ARTICLES
spot_img
spot_img
spot_img
spot_img
- Advertisment -spot_img
- Advertisment -spot_img

Recent News

Most Popular

You cannot copy content of this page