Sunday, September 20, 2026
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*गड़चिरोली: जिले के स्कूलों को डेस्क और बेंच सप्लाई के नाम पर लगभग 8.50 करोड़ के फंड में बड़े घोटाले का संदेह*

*गड़चिरोली: जिले के स्कूलों को डेस्क और बेंच सप्लाई के नाम पर लगभग 8.50 करोड़ के फंड में बड़े घोटाले का संदेह*

ज्योत्स्ना वानखेडे:गड़चिरोली जिले के स्कूलों को डेस्क और बेंच (बेंच) सप्लाई करने के नाम पर लगभग 8.50 करोड़ रुपए के फंड में बड़ा घोटाला होने का संदेह जिला प्रशासन के एक पत्र से मजबूत हुआ है, और इस मामले ने शिक्षा विभाग के बड़े अधिकारियों के होश उड़ा दिए हैं।

खास बात यह है कि जिन स्कूलों को यह सप्लाई किए जाने का दावा किया जा रहा है, उनमें से कई स्कूल वास्तव में बंद होने की चर्चा है, और यह पूरा मामला केवल कागजों पर घोड़े दौड़ाकर किया गया भ्रष्टाचार होने का संदेह व्यक्त किया जा रहा है। इससे जिले के खनन प्रभावित क्षेत्र के आदिवासियों का जीवन स्तर ऊंचा उठाने और उनके सर्वांगीण विकास के लिए मौजूद ‘जिला खनिज प्रतिष्ठान’ का फंड अब ठेकेदारों की जेबें भरने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है क्या, ऐसा गंभीर सवाल उठा है।

जिला खनिज प्रतिष्ठान के तहत अहेरी विधानसभा क्षेत्र के स्कूलों के लिए 2.50 करोड़ और जिले के अन्य जिला परिषद स्कूलों के लिए 6.00 करोड़, ऐसे कुल 8.50 करोड़ रुपए के दो कार्यों को प्रशासकीय मंजूरी दी गई थी। इन कार्यों के लिए 70 प्रतिशत फंड पहले ही वितरित किया जा चुका है और शेष 30 प्रतिशत फंड की मांग अब प्रशासन से की गई है। लेकिन, इस मांग पत्र पर जिलाधिकारी ने जो टिप्पणियां की हैं, उन्हें देखने पर यह स्पष्ट होता है कि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव है।

जिला योजना समिति के जिला खनिकर्म अधिकारी द्वारा मुख्य कार्यकारी अधिकारी को भेजे गए पत्र के अनुसार, इस कार्य का कोई भी तकनीकी स्पेसिफिकेशन या एस्टीमेट पेश नहीं किया गया है। सबसे गंभीर बात यह है कि सप्लाई की गई बेंचों की गुणवत्ता को लेकर कोई विस्तृत रिपोर्ट उपलब्ध नहीं होने से, यह सामान अत्यंत घटिया दर्जे का होने का संदेह गहरा गया है।

आदिवासी विकास और शैक्षणिक प्रगति की बातें करने वाले शिक्षा विभाग के कई बड़े अधिकारी अब इस मामले में रडार पर आ गए हैं। जिन स्कूलों को डेस्क और बेंच सप्लाई किए गए, वहां की वास्तविक छात्र संख्या कितनी है और छात्रों की उपस्थिति कितनी रहती है, इसका कोई भी आधिकारिक ‘डेटा’ पेश किए बिना ही करोड़ों का फंड उड़ा दिया गया है। इससे जिला खनिज प्रतिष्ठान का फंड वास्तव में दुर्गम इलाकों के छात्रों के हित में इस्तेमाल हो रहा है या केवल ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए सरकारी खजाने पर डाका डाला जा रहा है, ऐसा नाराजगी भरा सवाल पूछा जा रहा है।

अहेरी क्षेत्र जैसे संवेदनशील इलाके में भी छात्रों की जरूरतों का विचार किए बिना हुई यह सप्लाई प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करती है, और जब तक इस पूरे मामले की विस्तृत जांच नहीं हो जाती तब तक अगला फंड रोकने के निर्देश दिए गए हैं।

Raju Kisanrao Wankhede
Editor
+91 9420868738+91 9420868738rajuwankhede15@gmail.com
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