*सब-हेडलाइन 1:*
*सूचना के अधिकार से चौंकाने वाला खुलासा, शिक्षा विभाग के कामकाज पर सवाल*
*सब-हेडलाइन 2:*
*माध्यमिक शिक्षा विभाग में अधिकारी-कर्मचारी गायब; ‘कोर्ट गए हैं’ यही एकमात्र जवाब!*
*ज्योत्स्ना वानखेडे*:
बीड जिले की एक मराठी माध्यमिक स्कूल के बारे में सूचना के अधिकार (RTI) से मांगी गई जानकारी के बाद शिक्षा विभाग के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
*मामला क्या है?*
1. *स्कूल को 80% सरकारी अनुदान मिल रहा है:* जिला परिषद के अनुसार इस स्कूल को सरकार से 80% अनुदानित बताया जाता है। यहाँ के शिक्षकों को सरकार से हर महीने लाखों रुपये वेतन भी दिया जा रहा है।
2. *लेकिन रिकॉर्ड ही नहीं है:* RTI के तहत जब स्कूल की मान्यता, 80% अनुदान की मंजूरी, वेतन, शिक्षकों की नियुक्ति और अन्य जरूरी कागज मांगे गए, तो शिक्षा विभाग ने जवाब दिया कि *”बहुत कम जानकारी उपलब्ध है”* और जरूरी दस्तावेज विभाग में उपलब्ध नहीं हैं।
*सबसे बड़ा सवाल:*
जब सरकार हर महीने लाखों रुपये वेतन दे रही है, तो उस स्कूल का अधिकृत रिकॉर्ड शिक्षा विभाग के पास क्यों नहीं है? बिना मान्यता, बिना अनुदान मंजूरी, बिना शिक्षक नियुक्ति के आधार पर वेतन कैसे दिया जा रहा है?
*अधिकारी गायब:*
जब इस बारे में अधिकारियों से पूछा गया तो उनका एक ही जवाब था – *”अधिकारी कोर्ट गए हैं”*। इससे साफ है कि जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में अपनी जिम्मेदारी से बच रहे हैं।
*मांग:*
RTI कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब सरकारी पैसा खर्च हो रहा है तो उसका पूरा रिकॉर्ड होना चाहिए। अगर विभाग के पास रिकॉर्ड नहीं है तो यह सिर्फ लापरवाही नहीं बल्कि गड़बड़ी का मामला है। इसलिए इस पूरे प्रकरण की *उच्च स्तरीय जांच* होना जरूरी है।